
भगवान श्री कृष्ण हिंदुओं के 10 अवतारों में पूर्ण अवतार कहे जाते हैं, ,,कथा वाचक चेतना दीदी,,

ग्राम वासियों के सहयोग से आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का कर रहे हैं श्रवण।
खंडवा। भागवत कथा का एक-एक प्रशंग हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, भागवत कथा को हम जिस भाव से सुनते हैं यदि हमने उस पर अमल कर लिया तो हमारे जीवन में शांति के साथ हमारे जीवन का भी कल्याण हो सकता है। हमारे बड़े पुण्य प्रताप से हमें मानव जीवन प्राप्त हुआ है, मानव जीवन का सदुपयोग करें और देव शास्त्र गुरु के प्रति अपना समर्पण सदैव बनाए रखें, यह उदगार बोरगांव बुजुर्ग में आयोजित भागवत कथा का श्रवण कराते हुए कथा वाचक चेतना भारती जी ने व्यक्त किये। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि भागवत कथा को जब जब भी हम सुनते हैं एक नया अनुभव में प्राप्त होता है। बोरगांव बुजुर्ग ग्राम वासियों के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है बड़ी संख्या में कथा में उपस्थित होकर श्रद्धालु कथा का रसपान कर रहे हैं, कथा के पांचवें दिन चेतना दीदी ने कहा कि भगवान कृष्णलला अपने बाल्यकाल में अनेक लीलाएं करते है, जिनमे माखन चोरी करके भक्तो के जन्म जन्मांतर के पाप चोरी कर लेते है, गोवर्धन धारण करके तथा पूजन करके पर्वतो की महिमा का बखान करते है, तो कभी ब्रज की माटी खाकर भारत की माटी की महिमा को बतलाते है। कभी बास की बासुरी बजाकर प्रकृति में संगीत की मिठास घोल देते है , तो कभी गाय चराकर गौमाता की महिमा बतलाते है। पूर्ण ब्रम्ह भगवान श्री कृष्ण का श्रृंगार भी पूर्ण प्राकृतिक है; सिर पर मोर का मुकुट, कानो में कनेर के फूल, गले में वैजयंती के पुष्पों की माला, हाथ में बास की बासुरी इत्यादि। कृष्ण जैसा प्यारा व्यक्तित्व संसार में अन्यत्र कहीं देखने को नही मिल सकता इसीलिए तो श्री कृष्ण हिंदुओ के दस अवतारों में पूर्ण अवतार कहे जाते है। राधामय और कृष्णमय हो संपूर्ण ग्राम जैसे वृंदावन ही बन गया है।











